रेशम उत्पादन विषयक 03 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारम्भ।

रेशम उत्पादन विषयक 03 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारम्भ।


बहराइच 14 सितम्बर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच प्रथम के सभागार में गरीब कल्याण रोजगार अभियान के अन्र्तगत रेशम उत्पादन विषय पर प्रवासी श्रमिकों हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए केंद्र के प्रभारी डॉ0 एम0पी0 सिंह ने बताया कि जनपद में किसानों की आय को दोगुना करने में रेशम उत्पादन एक बेहतर साधन बन सकता है। उन्होनें बताया कि रेशम की खेती तीन प्रकार से होती है मलबेरी की खेती, तसर खेती एवं ऐरी खेती। रेशम प्रोटीन से बना एक रेशा है। सबसे अच्छा रेशम शहतूत की खेती से प्राप्त होता है। रेशम कीट अपनी प्यूपा अवस्था में शरीर के चारों ओर रेशमी धागा बनाकर अपने आप को धागे के बीच बंद कर लेता है जिसे कोया कहते हैं। इस प्रकार रेशम का धागा प्राप्त किया जाता है। डॉ सिंह ने बताया कि रेशम की खेती से किसान प्रतिवर्ष एक लाख रूपये तक का मुनाफा कमा सकता है।
प्रशिक्षण के अतिथि उप-निदेशक रेशम डॉ. एस. पी. सिंह ने विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि रेशम उत्पादन के लिए सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की अनुदानित योजनाएं संचालित की जा रही है। जिससे बहुत सारे किसान लाभान्वित हो रहे हैं। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आर. के. पांडेय ने रेशम की सूड़ी में लगने वाले कीट प्रबंधन आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण समन्वयक रेनू आर्य ने रेशम उत्पादन बिक्री एवं विपणन हेतु जानकारी दी और उन्होंने बताया कि रेशम उत्पादन का विदेशों में अच्छा बाजार होने से निर्यात की संभावनाएं काफी उज्जवल है।

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