कृषि विज्ञान केंद्र की मंजूरी मिलने से किसानों के चेहरे खिले

कृषि विज्ञान केंद्र की मंजूरी मिलने से किसानों के चेहरे खिले


रिपोर्ट्स- अच्छन खान

श्रावस्ती

श्रावस्ती जिले के तराई में अब किसानों के दिन बहुरने वाले हैं।
खेती-किसानी को उन्नतशील बनाने के लिए वर्षों से लंबित कृषि विज्ञान केंद्र को स्वीकृति मिल गई है। इसके लिए चिह्नित 52 एकड़ भूमि पर भवन निर्माण करने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग गई है। दो कृषि वैज्ञानिकों की तैनाती भी हुई है। यह केंद्र किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ तकनीकी प्रदर्शन व बीज उत्पादन का भी काम करेगा।
नेपाल सीमा पर स्थित श्रावस्ती जिले का कुल क्षेत्रफल 1633.78 वर्ग किलोमीटर है। इस पर लगभग 12 लाख की आबादी निवास करती है। परंपरागत जीवनशैली की आदी श्रावस्ती की बड़ी आबादी जीविकोपार्जन के लिए खेती-किसानी पर निर्भर है।
यहां एक लाख 35 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल कृषि योग्य भूमि है। इसमें से लगभग 82 हजार हेक्टेअर सिचित भूमि है। छोटे जोत के किसानों की यहां अधिकता है। खेती-किसानी में धान, गेहूं व गन्ने का उत्पादन प्राथमिकता से होता है। तकनीकी खेती न हो पाने से यहां के किसानों की माली हालत दुरुस्त नहीं है। रोजगार की तलाश में जिले की बड़ी आबादी परदेस की ओर पलायन करती है।
कोरोना संक्रमण के चलते अब तक लगभग 70 हजार लोग परदेस से घर लौट चुके हैं। नीति आयोग की ओर से चयनित आकांक्षी जिलों में शामिल श्रावस्ती के लोगों की आर्थिक उन्नति के लिए यहां खेती को फायदे का सौदा बनाना जरूरी है। कृषि विभाग के पास किसानों के लिए योजनाएं तो हैं, लेकिन रिस्क लेने के लिए किसानों को प्रेरित करने वाले कृषि वैज्ञानिकों का अभाव बना हुआ था।
वर्ष 2008 में जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की बात चली। इसके लिए सिरसिया ब्लॉक क्षेत्र के गब्बापुर गांव में 52 एकड़ भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया। केंद्रीय टीम ने जांच में इस भूमि को अनुपयोगी करार देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र का निर्माण यहां कराने पर सहमति नहीं दी। इसके बाद निर्माण का प्रस्ताव लटक गया। 12 वर्षों तक लगातार हुए प्रयास के बाद आखिरकार भारत सरकार ने इसी भूमि पर कृषि विज्ञान केंद्र का निर्माण कराने की सहमति दे दी।
खेती-किसानी को उन्नतशील बनाने के प्रयास में जुटने के लिए कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार व डॉ. उमेश कुमार की तैनाती भी कर दी गई है।