राहुल गांधी के साथ आए वरुण गांधी! चुनाव से पहले बढ़ाई भाजपा की मुश्किल

राहुल गांधी के साथ आए वरुण गांधी! चुनाव से पहले बढ़ाई भाजपा की मुश्किल

 
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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की आहट ने देश भर के राजनीतिक दलों को तो सक्रीय कर ही दिया है साथ ही कई राजनेताओं के भी सुरों को बुलंद कर दिया है। लोकतंत्र के सबसे बड़े त्योहार को लेकर हर कोई उत्साहित है, ऐसे में भला वरुण गांधी कैसे पीछे रह सकते हैं। चुनावी सुगबुगाहट के बीच वरुण गांधी ने भी बड़े संकेत देना शुरू कर दिए हैं। खास बात यह है कि भाजपा के इस नेता ने अब अपने भाई और पार्टी के धूर विरोधी राहुल गांधी को समर्थन दिया है।
दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार घेरते आ रहे हैं। इससे भाजपा पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है। लेकिन भाजपा का मुश्किल उस वक्त ज्यादा बढ़ गई जब पार्टी के ही नेता वरुण गांधी ने किसानों के मुद्दों को लेकर राहुल गांधी का पक्ष लिया। वरुण ने कहा कि साल 1952 से लेकर 2019 तक देश के 100 उद्योगपतियों को जितना पैसा दिया गया, उस रकम का केवल 17 फीसद धन ही केंद्र और राज्य सरकारों से किसानों को आर्थिक सहायता राशि के तौर पर अब तक मिला है। इससे ज्यादा शर्मनाक आंकड़ा कुछ नहीं हो सकता है।
धनी परिवारों को बांटा जा रहा रुपया
वरुण गांधी इंडिया डायलॉग कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसानों की हालत लगातार बिगड़ रही है। वरुण ने कहा कि देश में किसानों को अधिकतर योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल रहा है। देश में जब भी किसानों को आर्थिक सहायता देने की बात आती है तो हाहाकार मच जाता है। देश की 70 फीसद आबादी को बीते 67 वर्ष में जितनी आर्थिक मदद राज्य और केंद्र सरकारों ने मिलकर दी है, उससे कई गुना ज्यादा पैसा केवल 100 धनी परिवारों को दे दिया गया।
सिर्फ बड़े किसानों को फायदा
देश के किसानों की हालत पर चिंता जताते हुए वरुण ने कहा कि इसे समझने के लिए मैं बताता हूं कि देश में होने वाले कुल फल उत्पादन का 56 फीसदी शुरुआती 96 घण्टे में अच्छी कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था के अभाव में सड़ जाता है। अकेले उत्तर प्रदेश में हर साल 2000 टन उत्पादन होता है और यह बीते 15 साल से हो रहा है। मगर राज्य में कुल कोल्ड स्टोरेज भंडारण क्षमता 70 से 1000 टन है जिसका फायदा केवल बड़े किसान ही उठा पाते हैं।
वरुण गांधी ने कहा कि क्या आप जानते हैं कि भारत की मंडियों में किसानों के लिए अपने उत्पाद बेचने की खातिर इंतज़ार का औसत समय 1.6 दिन है। जब उसे इतना इंतजार करना पड़ता है तो वो कई बार मजबूरन अपना उत्पाद औने पौने दाम पर बेच देता है।
वरुण का बड़ा संकेत
दरअसल पिछले लंबे समय से वरुण गांधी किसानों विरोधी नीतियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते आ रहे हैं। उधर..राहुल गांधी ने भी के खिलाफ किसानों की बुरी दशा को लेकर मोर्चा खोल रखा है। ऐसे में वरुण का राहुल की बातों को समर्थन देना आने वाले चुनाव में बड़ा संकेत है। ये संकेत न सिर्फ कांग्रेस के लिए बल्कि भाजपा के लिए काफी अहम है।


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