जो बडे बडे स्कूल नही कर सके वह कर रहे शिक्षामित्र

शर्म से डूब मरें  वे लोग
जो
विद्यालय खोल कर
 अभिभावकों से लाखों रुपए का धन ऐंठ रहेहैं लेकिन
हमेशा बेसिक शिक्षा पर कटाक्ष करते हैं
पर
जिन्हें बेसिक शिक्षा में तैयार हो रहा यह हुनर नहीं दिखता

निजी विद्यालय वह हैं, जो केवल संपन्नजनों के मेधावी पाल्यों को
टेस्ट के द्वारा  प्रवेश देते हैं ,और अभिभावक अपने
पाल्यों को अपनी वाहन व्यवस्था द्वारा विद्यालय तक छोड़ते हैं ,
वे(निजी विद्यालय)उन्हें ही निखारतें हैं
अर्थात वे निखरे हुए बच्चों को ही निखारते हैं ,साथ ही
क्लास 1 से पहले 4 वर्ष तक बच्चों को अपने विद्यालय में पढ़ाते हैं।

जबकि बेसिक शिक्षा में ए टू जेड सभी का प्रवेश लिया जाताहै

शिक्षक ,उन
गैर जागरूक मां बाप के पाल्यों  को घर से व खेत से बुलाकर विद्यालय लाते हैं
जिनका फोकस बच्चे को खेती किसानी कराना वह मजदूरी कराने पर होता है।

किसी एक निजी विद्यालय का नाम बताइए ,
देश व प्रदेश में
जिसके शिक्षक या प्रधानाचार्य बच्चे को घर व खेत से बुलाकर लाते हो फिर पढ़ाते हों।
जबकि
बेसिक शिक्षा परिषद के अध्यापकों व शिक्षामित्र शिक्षकों की यह दिनचर्या है।
रिपोर्ट byइम्तियाज अहमद

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